प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने सुभाष दिवस मनाया, नेताजी को भारत रत्न दें केंद्र- शिवपाल

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लखनऊ । प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘सुभाष दिवस’ के रूप में मनाया। इस अवसर पर पीएसपी बौद्धिक सभा के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पार्टी प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नेताजी बोस एक सच्चे देश-प्रेमी व प्रतिबद्ध समाजवादी थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत में समाजवादी समाज का सपना देखा था। शिवपाल ने बताया कि हरिपुरा अधिवेशन में बतौर कांग्रेस अध्यक्ष नेताजी ने 19 फरवरी 1938 को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हमारी मुख्य राष्ट्रीय समस्याएं समाजवादी आधार पर ही प्रभावशाली ढंग से सुलझाई जा सकती हैं।

उन्होंने मार्च 1931 में कराची व 4 जुलाई 1931 को कोलकाता में गणतांत्रिक समाजवाद की प्रबल पैरवी की थी। श्री यादव ने कहा कि नेताजी को भारत रत्न से सम्मानित ना करना उनका ही नहीं पूरी आजाद हिंद फौज व सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान है। पंडित नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस व राम मनोहर लोहिया को लेकर काफी भ्रांतियां फैलाई गई हैं। यह सही है कि तीनों में आपसी मतभेद थे किंतु तीनों में गहरी मित्रता व अभिवृत्तिगत समानताएं भी थी जिसपर कभी चिंतन, लेखन व विमर्श नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नेहरू, सुभाष और लोहिया तीनों महान समाजवादी चिंतक लॉस्की के शिष्य और कई अभियानों में साझेदार थे। अखिल बंग विद्यार्थी परिषद में तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 10 मई 1936 को लोहिया के आग्रह पर ही पंडित नेहरू ने सुभाष दिवस मनाया और 1942 की क्रांति के दौरान लोहिया ने ‘आजाद हिंद फौज’ के सहयोग के लिए भूमिगत रहते हुए ‘आजाद दस्ता’ बनाया था। सुभाष, लोहिया व चरण सिंह को ‘भारतरत्न’ सम्मान दिलाने के लिए पीएसपी 6 फरवरी को देशभर में प्रदर्शन करेगी।
पूर्व मंत्री कमाल युसूफ मलिक ने कहा कि मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल खड़ा करने वालों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी पढ़नी चाहिए। उन्होंने आबिद हसन, कर्नल शाहनवाज व कैप्टन अब्बास अली जैसे मुसलमानों को आजादी की लड़ाई से जोड़ा व मुस्लिमों की जो रहनुमाई नेता जी ने की थी वही कयादत शिवपाल सिंह यादव कर रहे हैं।
पीएसपी बौद्धिक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवादी विचारधारा को मजबूत करना ही सुभाष चंद्र बोस को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि होगी। लोहिया, नेहरू और सुभाष की वैचारिक भावभूमि एक थी। व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद लंबे समय तक तीनों ने एक साथ काम किया और देश में सोशलिस्ट व सेकुलर जनमानस को सशक्त किया। नेताजी के स्वप्न को लोहिया ने सिद्धांत का रूप दिया जो पीएसपी की आत्मा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मोइरांग (मणिपुर) स्थित सुभाष की आजाद हिंद सेना के मुख्यालय को केंद्र सरकार बनवाए नहीं तो पीएसपी और हम समाजवादियों को दे दे। हम लोग भिक्षाटन कर आइएनएस मुख्यालय का जीर्णोद्धार करा कर देश की जनता को सौंप देंगे।
पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल ने सुभाष की विरासत को भारतीय राजनीति का अभीष्ट बताया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहायक बाबा भारद्वाज ने शिवपाल को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सभी सुभाषवादियों का साथ शिवपाल व पीएसपी को मिलेगा। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजवादी नेता चौधरी रिक्षपाल, पूर्व मंत्री शादाब फातिमा, पीएसपी राष्ट्रीय महासचिव रामनरेश ‘मिनी’, लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन कोहली, महानगर अध्यक्ष अजय त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।।

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