लखनऊ नगर निगम का जलकल विभाग विगत दो से तीन वर्षों से लाखो क्यूसेक पीने के पानी को कर रहा बर्बाद,

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फाइल फोटो

जीवन के मूल आवश्यकता के लिए जरूरी पानी

संवाददाता:- विकास सिंह

लखनऊ ।जहां मानव जीवन के लिए अति आवश्यक तत्व है वहीं इसकी बर्बादी के लिए भी मानव के उदासीनता और सरकारों की लापरवाही उदासीनता इस अमृत को बर्बादी के लिए कहीं ना कहीं उत्तरदाई है। भारत देश के कई ऐसे प्रांत हैं जहां करोड़ों की आबादी पानी की एक एक बूंद को तरसती है। इन सूखाग्रस्त क्षेत्रों की आम जनता को कई कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी की आवश्यकता को पूर्ण करना पड़ता है। वही उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का बड़ा भाग पीने के पानी की एक एक बूंद को लेकर निरंतर संघर्ष करता रहता है। सरकारें भी बुंदेलखंड में ट्रेनों पर खाली पानी के कंटेनर भेजकर जनता का मजाक उड़ाने में पीछे नहीं रही थी। देश प्रदेश व स्थानीय निकाय की सरकार जनता को जागरूक करने और जल संरक्षण जल संचयन को लेकर करोड़ों के विज्ञापन कर खूब जोर से ढोल तो पिटती है लेकिन काम ढोल के पोल वाला ही रहता है। धरातल पर कुछ और कथन में कुछ और जब भविष्यवक्ता अगला विश्वयुद्ध पानी के नाम पर होने की बात कर रहे थे । और भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल बचाने को लेकर लोगों में अपील कर जनता को जागरूक करने में किसी भी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मगर प्रदेशो के उनके ही भ्रष्ट अधिकारियों को किसी भी आदेशो की परवाह नही होती और कमीशन के चलते सारा खेल होता रहता है। जिसके कारण केवल ढोल पीटने के सिवाय कोई भी कार्य नही होता दिखाई दे रहा है। ऐसी ही लखनऊ नगर निगम के लापरवाह अधिकारियों तथा नेताओं की लापरवाही से नगर निगम जोन-2 के राजेंद्र नगर वार्ड में विगत दो से ढाई साल पहले से मेन लाइन में लीकेज हुआ था जिसमे नगर निगम के अधिकारीयों ने समस्या का निस्तारण करने के बजाए लीपापोती करके लीकेज के स्थान पर पाइप लाइन के ऊपर चेंबर बना कर चंबर के अंदर से अंडरग्राउंड पाइप डालकर सालों से बड़ी मात्रा में 24 घंटे पानी को नालियों में बहा दिया और आज भी बहाया जा रहा है। वही हमारे समाचार पत्र के संवाददाता स्थानीय नागरिकों से उनका पक्ष जाना तो स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पाइप लीकेज पिछले ढाई से तीन सालों से लगातार इसी तरह काफी भारी मात्रा में बह रहा है जिसके कारण अब तक लाखों क्यूसेक पानी बह चुका होगा। जिसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम के अधिकारियों तथा स्थानीय पार्षद से कई बार की मगर उसका कोई भी निस्तारण ना करके लीकेज के पास चेंबर बनाकर अंडरग्राउंड पाइप डालकर उसका सारा पानी नाली में मिला दिया गया जिसके कारण पानी का बहाव कभी भी किसी को दिखाई नहीं देता है। वहीं जब हमारे संवाददाता ने नगर निगम के जल-कल विभाग के अवर अभियंता एवं अधिशासी अभियंता से इस पानी की बर्बादी के लिए बात कर अधिकारियों की उदासीनता का पक्ष जानने के लिए प्रयास किया गया तो समस्याओं के निस्तारण पर ध्यान ना देते हुए बातों को टालमटोल कर दिया और लीपापोती कर समस्याओं को जस का तस वैसे ही छोड़ दिया और पानी को बर्बादी आज भी निरंतर अपनी गति से चलाएं मान है। आखिर ऐसा क्यों इसका जवाब तो अब अधिकारी या स्थानीय नेता मंत्री ही जाने।

फाइल फोटो


दिन पर दिन गिरता जा रहा है धरती का जलस्तर

 मुख्य कारण:-

1:-वाहन कंपनियों में गाड़ियों की सर्विसिंग के उपयोग में आने वाले पानी के लिए अवैध रूप से बोरिंग करवा कर अपने कॉमर्शियल उपयोग में और गाड़ियों को धुलने के उपयोग में लाया जाता है और उपयोग हुआ पानी को नालियों में बहा दिया जाता है जबकि उसी उपयोग हुए पानी को आधुनिक यंत्रों के द्वारा दोबारा उपयोग किया जा सकता है मगर कोई भी सर्विस सेंटर इस को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता है और वहीं स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह कार्य आसानी से चलता रहता है और कोई भी अधिकारी इस पर कार्यवाही ना करते हुए ऐसे सर्विसिंग सेंटर को बढ़ावा दिया जाता है।

2:- घरों और कॉलेजों में और कमर्शियल जगहों पर हो रही अंधाधुन बोरिंगो के कारण भी बहुत ज्यादा देखा जा रहा है। क्योंकि पहले मेहनत पड़ने के कारण उतना ही पानी उपयोग में लिया जाता था जितना के लोगों के लिए जरूरी होता था अब अत्याधुनिक उपकरणों के कारण होने वाले विद्युत यंत्रों के उपयोग की वजह से बटन दबाकर चला दिया जाता है और लोग बंद करना अक्सर भूल जाते हैं। जिसके कारण घंटो घंटो मोटर चलती है और पानी की बर्बादी को अक्सर देखा जाता रहा है और तो और अक्सर लोगों को अपने घरो पर वाहनों को धुलने के लिए मोटे मोटे पाइपों से घंटों अपने वाहनों को अक्सर धुलते देखा जाता रहा है जिसके कारण गाड़ी की धुलाई में कुछ मात्रा में उपयोग होने वाले पानी को काफी भारी मात्रा में बर्बाद कर देते हैं।।

3:- हैंडपंप का चलन खत्म करके हर जगह समरसेबल का उपयोग होना यह भी काफी बड़ी वजह माना जा रहा है।।


सरकार के द्वारा विश्व जल संरक्षण दिवस
जहां लोगों में जल के प्रति जागरूकता लाने के लिए सरकार तरह-तरह के उपाय और योजनाओं को लागू कर लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास करती है उसी के साथ-साथ 22 मार्च को विश्व जल दिवस को भी मनाया जाता है मगर यह सब अब खाली दिवस आज जनता के लिए और मंत्री और अधिकारियों के फोटो खिंचवाने का और प्रचार-प्रसार का ही अवसर ही बनकर रह जाता है बाद में वही सब ढाक के तीन पाथ।।

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