उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों की सुविधा एवं पारदर्षिता हेतु चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा विकसित वेब पोर्टल’ तथा मोबाइल एप का शुभारम्भ किया,

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में गन्ना किसानों की सुविधा एवं पारदर्षिता हेतु चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा विकसित वेब पोर्टल ‘www.caneup.in’ तथा  ‘e-Ganna’  मोबाइल एप का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि गन्ना ई0आर0पी0 व्यवस्था के अन्तर्गत विकसित किए गए वेब पोर्टल ‘www.caneup.in’ तथा  ‘e-Ganna’   मोबाइल एप तथा एस0एम0एस0 के आधार पर भी तौल की व्यवस्था होने, समितियों के सुदृढ़ीकरण तथा प्रशासनिक सुधार के कारण बिचैलियों पर अंकुश लगेगा। अब गन्ना किसानों को समिति कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें घर बैठे सारी जानकारियां सुलभ होंगी। गन्ना किसानों की सुविधा एवं पारदर्शिता के लिए यह वेब पोर्टल तथा एप विकसित किए गए हैं। अब गन्ने की घटतौली भी रोकी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गन्ना उत्पादकों की खुषहाली के लिए उन्हें नई तकनीक भी उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित आज जिन नई सुविधाओं का शुभारम्भ किया गया है, वह गन्ना किसानों के कल्याण के प्रति वर्तमान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है। गन्ना किसानों की गन्ना आपूर्ति के लिए गन्ना क्षेत्रफल एवं उत्पादन का निर्धारण, बेसिक कोटा एवं सट्टे का आकलन, कैलेण्डरिंग एवं पर्चियों का निर्गमन सम्बन्धित गन्ना समिति का दायित्व होता है। पूर्व वर्षों में यह व्यवस्था समितियों से हटाकर चीनी मिलों को हस्तान्तरित कर दी गई थी। चीनी मिलों की मनमानी से गन्ना आपूर्ति में अव्यवस्था, माफियाओं के वर्चस्व तथा भ्रष्टाचार से वास्तविक गन्ना किसानों का हित प्रभावित हो रहा था। 
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने माफियागिरी एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टाॅलरेंस की नीति अपनाई है। इसके क्रम में राज्य सरकार ने चीनी मिलों से पर्ची निर्गमन का कार्य वापस लेकर पेराई सत्र 2018-19 में पुनः गन्ना समितियों को सौप दिया जायेे । सत्र 2018-19 में पहली बार विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के तहत गन्ना समितियों द्वारा क्षेत्रीय वेण्डरों के माध्यम से पर्ची निर्गमन का कार्य सफलतापूर्वक सम्पादित किया गया। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि चीनी मिलों को ताजे गन्ने की आपूर्ति हुई, गन्ना किसानों को गन्ने के अधिक वजन का मूल्य मिला तथा चीनी मिलों को अधिक रिकवरी के रूप में फायदा हुआ। ताजा गन्ना आपूर्ति से गन्ने की सूख कम हो गई। इसके परिणामस्वरूप गन्ना किसानों को अतिरिक्त गन्ना मूल्य प्राप्त हुआ। इसके अलावा, चीनी रिकवरी में 0.62 प्रतिशत की वृद्धि हो जाने से अतिरिक्त चीनी उत्पादन भी हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसान सुचारु रूप से सही गन्ना आपूर्ति कर सकें, इसके लिए पर्चियों के निर्धारण एवं निर्गमन में एकरूपता तथा पूरी पारदर्शिता लाने के लिए वर्तमान पेराई सत्र से एकीकृत नई गन्ना ई0आर0पी0 प्रणाली अपनायी गई है। इसके माध्यम से सर्वे डेटा, प्री-कैलेण्डर, गन्ना कैलेण्डर तथा पर्चियों का निर्गमन सुचारु तरीके से किया जा सकेगा। गन्ना ई0आर0पी0 के माध्यम से गन्ना किसानों को उनके मोबाइल पर एस0एम0एस0 के माध्यम से पर्ची सम्बन्धी सूचना प्राप्त कराये जाने की व्यवस्था की गई है। इसे दिखाकर भी गन्ना किसान तौल करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए गन्ना आयुक्त कार्यालय में टोल फ्री नम्बर-1800-121-3203 पर 24 घण्टे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। राज्य सरकार का हमेशा यह प्रयास रहा है कि गन्ना किसानों को किसी भी स्तर पर कोई असुविधा न होने पाए। गन्ना उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है। यह फसल प्रदेश के 50 लाख गन्ना किसान परिवारों की जीविका का आधार होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान को अन्नदाता मानते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आमदनी को वर्ष 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, विभिन्न खाद्यान्नों के समर्थन मूल्य में वृद्धि, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान आदि के लिए योजनाएं लागू की गयी है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पी0एम0 किसान) जैसी महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से सभी किसानों को सीधे 06 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रतिवर्ष उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा कि अच्छा होता यदि इन योजनाओं को आजादी के बाद ही लागू किया जाता। 
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मार्च, 2017 में वर्तमान सरकार ने जब सत्ता सम्भाली, तब राज्य में गन्ना किसानों की स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। चीनी मिलें बन्द हो रही थीं और कई बेची भी जा चुकी थीं। किसानों के गन्ना बकाये का भुगतान नहीं हो रहा था। राज्य सरकार ने इन परिस्थितियों का आकलन करते हुए सबसे पहले किसानों के पूरे गन्ने की पेराई का निर्णय लिया और इसे सुनिष्चित भी किया। राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में चीनी मिल मालिकों से गन्ना बकाये के भुगतान के सम्बन्ध में दो टूक बात की, जिसका परिणाम है कि आज लगभग 76 हजार करोड़ रुपए के गन्ना बकाये का भुगतान सुनिष्चित कराया जा चुका है। भुगतान की राषि सीधे किसानों के खातों में डी0बी0टी0 के माध्यम से पहुंचायी गई है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों की उदासीनता के कारण कई चीनी मिलें बन्द कर दी गईं, जिससे उन चीनी मिलों में काम कर रहे कर्मचारी बेरोजगार हो गए। गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हुई और नौजवानों के लिए रोजगार के नये अवसर बन्द हो गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों एवं नौजवानों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी और तय किया कि अब प्रदेश की कोई भी चीनी मिल बन्द नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि एक चीनी मिल लगभग 50 हजार गन्ना किसान परिवार तथा 8500 व्यापारियों और 4000 नौजवानों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के माध्यम से लाभान्वित करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेष में लगभग 50 लाख गन्ना किसान मौजूद हैं और इस क्षेत्र पर लगभग ढाई करोड़ लोग निर्भर हैं। अतः राज्य सरकार ने अपने विगत ढाई वर्षों से अधिक के कार्यकाल के दौरान आवश्यकतानुसार नई चीनी मिलों की स्थापना तथा पहले से स्थापित चीनी मिलों के विस्तार एवं आधुनिकीकरण पर फोकस किया है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली में गन्ने के योगदान एवं रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल की बन्द पड़ी निगम क्षेत्र की चीनी मिल पिपराइच एवं मुण्डेरवा में 5000 टी0सी0डी0 क्षमता की नई मिल का निर्माण कराया गया है। जनपद बागपत में सहकारी क्षेत्र की रमाला चीनी मिल तथा जनपद मेरठ में निगम क्षेत्र की मोहिउद्दीनपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ायी गई है, ताकि किसानों के अतिरिक्त उपलब्ध गन्ने की सुगम आपूर्ति हो सके। वर्तमान में राज्य में 119 चीनी मिलें कार्यरत हैं। इसके अलावा, शीघ्र ही 02 नई चीनी मिलें संचालित हो जाएंगी। राज्य सरकार ने निरन्तर किसानों को हर सम्भव सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में किसान भाइयों को सदैव जागरूक रहने, नई तकनीक से लैस रहने के साथ ही, केवल मण्डी के भावों की जानकारी ही नहीं, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव का ज्ञान होना भी जरूरी है। राज्य सरकार किसानों की आय वृद्धि के लिए उत्पादकता वृद्धि, खेती की लागत में कमी और उत्पाद का सही मूल्य दिलाने की व्यवस्था पर विशेष बल दे रही है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गन्ना किसानों की समृद्धि के दृष्टिगत चीनी उत्पादन में इस्तेमाल के बाद बचे हुए गन्ने से एथनाॅल बनाने की व्यवस्था पर भी कार्य कर रही है। शीघ्र ही इसके सुपरिणाम मिलने लगेंगे। उन्होंने कहा कि अब चीनी मिल लगाने का मतलब फायदे का सौदा होगा। उन्होंने राज्य में ‘शुगर डेवलपमेण्ट फण्ड’ की स्थापना पर बल दिया, ताकि यह सेक्टर ‘सेल्फ सस्टेनेबल’ बन सके। उन्होंने कहा कि इस फण्ड का उपयोग किसानों के हित में किया जा सकता है। 
पराली तथा गन्ने की पत्तियां जलाने की समस्या और इससे फैलने वाले प्रदूषण के मद्देनजर मुख्यमंत्री जी ने उपस्थित किसानों से इन्हें न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इनके जलाने से प्रदूषण तो फैलता ही है, साथ ही खेत की उर्वरता भी कम होती है। इस प्रदूषण का असर मनुष्य के अलावा, पशु-पक्षियों तथा पेड़-पौधों पर भी पड़ता है। इस समस्या का समाधान पराली तथा फसलों के अन्य अवषेषों की कम्पोस्ट खाद बनाने से निकाला जा सकता है। राज्य सरकार प्रदेष में बायोफ्यूल की इकाइयां स्थापित कर पराली तथा अन्य अवषेषों की कीमत किसानों को दिलवाने की दिषा में कार्य कर रही है। इनसे विद्युत उत्पादन की सम्भावनाओं को भी तलाषा जा रहा है। 
कार्यक्रम को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में गन्ना बुआई के क्षेत्रफल में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेष में वर्ष 2016-17 में जहां 20 लाख हेक्टेयर गन्ना बोया गया था, वहीं अब यह क्षेत्रफल बढ़कर 28 लाख हेक्टेयर हो चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम के अन्त में गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश पासी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 
इस अवसर पर मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय आर0 भूसरेड्डी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादक मौजूद थे।

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