उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रीमंडल में पास हुए कई अहम प्रस्ताव,

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सिद्धार्थ नाथ सिंह-(दाएं) एवं श्री कांत शर्मा (बाएं) कैबिनेट मंत्री उ°प्र°

मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-जनपद सोनभद्र के ग्राम उम्भा में चिन्हित सभी 37 परिवारों को ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान’
में सम्मिलित करने के प्रस्ताव का कार्याेत्तर अनुमोदन

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं के क्रम में जिलाधिकारी सोनभद्र के दिनांक 10 सितम्बर, 2019 के पत्र द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूची के अनुसार जनपद सोनभद्र के ग्राम उम्भा में चिन्हित सभी 37 परिवारों को ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान’ में सम्मिलित करने के प्रस्ताव को कार्याेत्तर अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

मंत्रिपरिषद ने भविष्य में ऐसे पात्र परिवार/लाभार्थी समूह पाये जाने पर, जिन्हें योजना में शामिल किये जाने का निर्णय लिया जाता है, तो मंत्रिपरिषद द्वारा पूर्व अनुमोदित लाभार्थी परिवारों की संख्या 10,11,980 में से शेष बचे 1,68,067 परिवारों की संख्या की सीमा तक ऐसे चिन्हित परिवारों को ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान’ में सम्मिलित करने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने का निर्णय भी लिया है।ऐसे चयनित परिवारों/लाभार्थी समूह की पात्रता सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी द्वारा प्रमाणित किये जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद ने अनुमोदन प्रदान किया है।

आरोग्य निधि के अन्तर्गत स्थापित ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा कोष’
में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने आरोग्य निधि के अन्तर्गत स्थापित ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा कोष’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। पूर्व में व्यवस्था थी ‘बी0पी0एल0 कार्ड न होने की दशा में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदत्त आय प्रमाण पत्र निर्धारण के लिए पर्याप्त समझा जाएगा। प्रतिबन्ध यह है कि सम्बन्धित रोगी के परिवार की आय समस्त स्रोतों से 24,000 रुपये से अधिक न हो अथवा तत्समय बी0पी0एल0 के लिए निश्चित धनराशि के समतुल्य हो।’ इसके स्थान पर प्राविधान किया गया है, ‘बी0पी0एल0 कार्ड न होने की दशा में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदत्त आय प्रमाण पत्र निर्धारण के लिए पर्याप्त समझा जाएगा। प्रतिबन्ध यह है कि सम्बन्धित रोगी के परिवार की आय समस्त स्रोतों से तत्समय बी0पी0एल0 के लिए निर्धारित धनराशि के समतुल्य हो।’
इसी प्रकार, पूर्व व्यवस्था ‘गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे व्यक्तियों अथवा उनके परिवार के सदस्य एवं निराश्रितों को सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाएं राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध चिकित्सालयों, संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ, छत्रपति शाहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय से सम्बद्ध गांधी मेमोरियल चिकित्सालय या समिति द्वारा उपयुक्त समझी जाने वाली अन्य चिकित्सा इकाइयों, केन्द्र सरकार के नियंत्रणाधीन आई0एम0एस0, बी0एच0यू0 वाराणसी, जवाहर लाल नेहरू मेडिकल काॅलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा प्रदेश के बाहर केवल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में अधिकृत समिति के संदर्भण के उपरान्त उपचार के पात्र होंगे।’ को संशोधित करते हुए व्यवस्था की गयी है, ‘गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे व्यक्तियों अथवा उनके परिवार के सदस्य एवं निराश्रितों को वर्तमान प्रचलित व्यवस्था के अतिरिक्त प्रदेश के वर्तमान/तत्समय समस्त राजकीय चिकित्सालयों/मेडिकल काॅलेजों व राज्य सरकार के अनुदान से संचालित समस्त चिकित्सालयों में इलाज की सुविधा होगी।’

इसके अतिरिक्त, मंत्रिपरिषद ने निर्णीत प्रस्ताव में किसी विचलन/संशोधन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत करने का निर्णय भी लिया है।

राजकीय मेडिकल काॅलेजों में संविदा के आधार पर नियुक्त किये जाने वाले
चिकित्सा शिक्षकों के मानदेय के पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने राजकीय मेडिकल काॅलेजों में संविदा के आधार पर नियुक्त किये जाने वाले चिकित्सा शिक्षकों के मानदेय के पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।

राजकीय मेडिकल काॅलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी होने के कारण एम0बी0बी0एस0 पाठ्यक्रम की मान्यता बनाये रखने, स्नातक एवं परास्नातक सीटों में वृद्धि किये जाने तथा उक्त काॅलेजों में अध्ययनरत छात्रों के शिक्षक-प्रशिक्षण एवं शोध सम्बन्धी कार्याें के सुचारु सम्पादन व मरीजों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है। वर्णित स्थिति में राजकीय मेडिकल काॅलेजों में चिकित्सा शिक्षकों को आकर्षित किये जाने हेतु संविदा के आधार पर कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को दिये जाने वाले नियत मानदेय यथा आचार्य को 90,000 रुपये के स्थान पर 1,35,000 रुपये, सह आचार्य को 80,000 रुपये के स्थान पर 1,20,000 रुपये, सहायक आचार्य को 60,000 रुपये के स्थान पर 90,000 रुपये तथा प्रवक्ता को 50,000 रुपये के स्थान पर 75,000 रुपये किया गया है।

विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर आॅफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 (मेगा परियोजना) के अन्तर्गत विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर आफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। प्रस्ताव के अनुसार मेसर्स हल्दीराम स्नैक्स प्रा0 लि0 गौतमबुद्ध नगर, मेसर्स जे0के0 सीमेन्ट लि0 अलीगढ़, मेसर्स सिल्वरटन पल्प एण्ड पेपर्स प्रा0 लि0 मुजफ्फरनगर, मेसर्स एस0एल0एम0जी0 बेवरेजेस प्रा0 लि0 बाराबंकी, मेसर्स के0आर0 पल्प एण्ड पेपर लि0 शाहजहांपुर, मेसर्स ग्रीनप्लाई इण्डस्ट्रीज लि0 हरदोई, सण्डीला तथा मेसर्स निकिता पेपर्स लि0 जिला शामली को लेटर आॅफ कम्फर्ट निर्गत किये जाएंगे। इन इकाइयों द्वारा प्रदेश में लगभग 2,862.70 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 7,592 रोजगार सृजन होगा।

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना का बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना के बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण किये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। सभी बैंकों से यूपीडा द्वारा परियोजना के सम्बन्ध में लिये जाने वाले प्रस्तावित ऋण की अधिकतम राशि 7,000 करोड़ रुपये होगी। यह राशि तीन वर्षाें में यूपीडा की आवश्यकतानुसार समय-समय पर बैंकों से आहरित की जाएगी। परियोजना के सिविल निर्माण कार्याें के लिए आवश्यक शेष धनराशि शासन द्वारा यूपीडा को आनुपातिक आधार पर मार्जिन मनी के रूप में यथासमय उपलब्ध करायी जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी बैंकों/कंसोर्शियम के पक्ष में इस आशय का एक सहमति पत्र भी जारी किया जाएगा। इस ऋण राशि के लिए कंसोर्शियम व्यवस्था अपनायी जाएगी। ऋण की तात्कालिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत प्रारम्भ में बैंक आॅफ बड़ौदा से एकल रूप में प्रारम्भिक ऋण प्राप्त किया जाएगा। कंसोर्शियम की स्थापना के पश्चात ज्यों-ज्यों अन्य बैंकों के स्वीकृति पत्र प्राप्त होते जाएंगे, तब-तब उन्हें कंसोर्शियम में शामिल कर लिया जाएगा।
टोल राशि के माध्यम से यूपीडा द्वारा ऋण की अदाएगी करने की स्थिति में आने तक लगभग तीन वर्ष के लिए त्रैमासिक आधार पर ब्याज की धनराशि का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना के व्ययभार में केन्द्र सरकार की कोई भागीदारी नहीं है। इस निर्णय से 7,000 करोड़ रुपये की सीमा तक बजट प्रतिभार कम हो सकेगा, जिसका उपयोग राज्य सरकार अन्य कार्याें हेतु कर सकेगी। साथ ही, ‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना’ के वित्तीय संसाधनों की अतिरिक्त उपलब्धता से निर्माण कार्य को गतिमान किया जा सकेगा। ‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना’ के वित्तीय संसाधनों की अतिरिक्त उपलब्धता से निर्माण कार्य को गतिमान किया जाने के कारण इस परियोजना के समस्त लाभ जनसामान्य को यथाशीघ्र प्राप्त हो सकेंगे। यह प्रस्ताव शासन द्वारा पूर्व में अनुमोदित ‘पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना’ के निर्माण हेतु बैंकों के कंसोर्शियम से लिए गए ऋण के अनुरूप ही है।

‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना’ के वित्तीय संसाधनों की अतिरिक्त उपलब्धता से निर्माण कार्य को गतिमान किये जाने के कारण इस परियोजना से होने वाले रोजगार सृजन सम्बन्धी कार्याें को भी गति मिलेगी।

श्री काशी विश्वनाथ विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना के अन्तर्गत
श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद, वाराणसी एवं श्री काशी
विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा कृत कार्यवाहियां अनुमोदित

मंत्रिपरिषद के समक्ष श्री काशी विश्वनाथ विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना के अन्तर्गत श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद, वाराणसी एवं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गयी कार्यवाहियों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। मंत्रिपरिषद ने इन कार्यवाहियों को अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि धमार्थ कार्य विभाग द्वारा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण की योजना प्रारम्भ की गयी है। इस योजना हेतु श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद, वाराणसी का गठन किया गया है। इस योजना के अन्तर्गत प्रथम चरण मंे चिन्हित 296 भूमि/भवनों के क्रय हेतु जिलाधिकारी, वाराणसी को वित्तीय वर्ष 2017-18 में 40 करोड़ रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 में 358.33 करोड़ रुपये कुल 398.33 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गयी है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र वाराणसी के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण योजना के अन्तर्गत श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद द्वारा अब तक कुल 281 सम्पत्तियां क्रय की गयी हैं। क्रय की गयी 234 सम्पत्तियों का ध्वस्तीकरण कर कर मलबा निस्तारित कर दिया गया है। शासनादेश संख्या-260/57-2018-3(70)/2013 दिनांक 25 फरवरी, 2018 द्वारा क्रय किये जाने वाली सम्पत्तियों की मूल्यांकित धनराशि के दो गुने धनराशि से कम की धनराशि पर निगोशिएशन हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी। इस समिति द्वारा सम्बन्धित पक्षों से वार्ता कर, शासन से अनुमोदित विक्रय विलेख के प्रारूप पर विक्रय विलेखों का निष्पादन कराया गया है। क्रीत भवनों के अध्यासियों को पुनर्वासन हेतु मंदिर न्यास निधि से रुपये 1 से 10 लाख तक की धनराशि प्रदत्त कर भवनों को खाली कराकर ध्वस्त कराया गया है।

भवनों के ध्वस्तीकरण व मलबा निस्तारण के कार्य को शीघ्र कराये जाने के क्रम में, मंदिर न्यास निधि से कुल धनराशि 4.40 करोड़ रुपये व्यय की गयी, जिसका अनुमोदन न्यास परिषद की बैठक दिनांक 16.06.2019 में सर्व सम्मति से पारित किया गया है एवं परिषद के माध्यम से उक्त हेतु शासनादेश संख्या 1355/57-2018-3(70)/2013 दिनांक 14 सितम्बर, 2018 द्वारा भी अर्जित भवनों के ध्वस्तीकरण व मलबा निस्तारण हेतु 10 करोड़ रुपये की धनराशि परिषद से स्वीकृत है।

भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना हेतु, भूमि अधिग्रहण में की गयी
अनियमितताओं की शिकायतों के सम्बन्ध में, मण्डलायुक्त, मेरठ की 29 सितम्बर, 2017 की
जांच आख्या में की गयी संस्तुतियों पर कार्यवाही के सम्बन्ध में

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना हेतु जनपद गाजियाबाद के ग्राम डासना, रसूलपुर सिकरोड, कुशलिया तथा नाहल में अधिग्रहीत भूमि के सम्बन्ध में शिकायतें प्राप्त हुई थी जिसकी तत्कालीन मण्डलायुक्त मेरठ श्री प्रभात कुमार द्वारा जांच की गयी थी।
एन0एच0एक्ट-1956 की धारा 3ए का दिनांक 08 अगस्त, 2011 एवं 3डी का वर्ष 2012 में नोटिफिकेशन तथा अवार्ड वर्ष 2013 में हुआ। अवार्ड के विरुद्ध भूस्वामियों के द्वारा आर्बीट्रेशन वाद दाखिल किये गये। आर्बीट्रेटर द्वारा वर्ष 2016 एवं 2017 में आर्बीट्रेशन में आदेश पारित किये गये तथा नये भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार प्रतिकर निर्धारित किया गया।
मण्डलायुक्त मेरठ द्वारा जांच में संस्तुति की गयी कि एन0एच0एक्ट-1956 की धारा 3डी के पश्चात भूमि क्रय की गयी। तत्कालीन जिलाधिकारी/आर्बीट्रेटर, गाजियाबाद द्वारा आर्बीट्रेशन वादों में नये भूमि अर्जन अधिनियम 2013 के अन्तर्गत प्रतिकर की दर को बढ़ा दिया गया। जिसके कारण प्रतिकर का वितरण नहीं हो पाया और वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया। कब्जा न मिल पाने के कारण परियोजना का कार्य अवरूद्ध है।
मण्डलायुक्त मेरठ की जांच में आच्छादित 4 ग्रामों की अर्जित भूमि क्षेत्रफल 71.1495 हेक्टेयर का सक्षम प्राधिकारी द्वारा धनराशि 1,11,94,26,638 रुपये का अभिनिर्णय घोषित किया गया। निर्णीत आर्बीट्रेशन वादों में निहित धनराशि 3,19,16,53,331 रुपये एवं लम्बित आर्बीट्रेशन वादों में, पूर्व में निर्णीत आर्बीट्रल दरों के अनुसार 1,67,81,81,592 रुपये की धनराशि आंकलित होती है, जिसका कुल योग 4,86,98,34,923 रुपये आंकलित होता है।
इस सम्बन्ध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 06.11.2019 से प्राप्त आख्या एवं मा0 महाधिवक्ता उ0प्र0 के विधिक परामर्श के दृष्टिगत दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना के अन्तर्गत 04 ग्रामों (डासना, रसूलपुर सिकरोड, कुशलिया तथा नाहल) के आर्बीट्रेशन अवार्ड के सापेक्ष प्रतिकर का वितरण किया जाना है।

एन0एच0एक्ट 1956 की धारा-3डी के अन्तर्गत अधिसूचना निर्गत होने के उपरान्त किये गये बैनामों को निरस्त किये जाने की विधिक कार्यवाही की जायेगी। इसमें संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध प्रचलित कार्यवाही यथावत जारी रहेगी और विधि विरुद्ध प्रक्रिया में सम्मिलित/जांच में दोषी पाये गये किसी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध यदि कार्यवाही नहीं की गयी है, तो अब अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर दी जायेगी।

सूचना सलाहकार, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के
नियत मानदेय, भत्तों एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में

श्री शलभ मणि त्रिपाठी एवं डाॅ0 रहीस सिंह को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सलाहकार के पद एवं गुरुतर दायित्व तथा उपादेयता एवं विशद अनुभव के दृष्टिगत मंत्रिपरिषद द्वारा नियत वेतनमान 40,000 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 1,00,000 रुपये प्रतिमाह तथा आवासीय भत्ता 10,000 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 25,000 रुपये प्रतिमाह दिये जाने का निर्णय लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि वित्त विभाग के शासनादेश दिनांक 15 दिसम्बर, 2014 द्वारा विभिन्न विभागों में नामित किये जाने वाले सलाहकारों को अन्य सुविधाओं के साथ प्रतिमाह 40,000 रुपये नियत वेतनमान एवं 10,000 रुपये आवासीय भत्ता अनुमन्य है।

यह भी ज्ञातव्य है कि श्री शलभ मणि त्रिपाठी एवं डाॅ0 रहीस सिंह को कार्यालय ज्ञाप दिनांक 09 नवम्बर, 2019 द्वारा अग्रिम आदेशों तक के लिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 का सलाहकार नामित किया गया है।

राजकीय मेडिकल काॅलेज, आगरा में केन्द्रीय पुस्तकालय के
नवीन भवन के निर्माण हेतु काॅलेज परिसर में स्थित निष्प्रयोज्य
भवनों के ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने राजकीय मेडिकल काॅलेज, आगरा में केन्द्रीय पुस्तकालय के नवीन भवन के निर्माण हेतु काॅलेज परिसर में स्थित पुराने व निष्प्रयोज्य भवनों यथा ब्लड बैंक (क्षेत्रफल 310.65 वर्ग मी0), टिटनेस वार्ड (553.95 वर्ग मी0) तथा विकलांग कार्यशाला (251.39 वर्ग मी0) के ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा इन भवनों के ह्रासित मूल्य 18,98,228 रुपये तथा ध्वस्तीकरण की लागत 7,53,674.05 रुपये में से मलबा मूल्य 11,93,370.78 रुपये को घटाने के उपरान्त अवशेष धनराशि 14,58,531.27 रुपये को बट्टे खाते में डाले जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।

राज्य सम्पत्ति विभाग के स्टाफ पूल में प्रतिस्थापन
स्वरूप 16 नये वाहनों के क्रय को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने राज्य सम्पत्ति विभाग के स्टाफ पूल में प्रतिस्थापन स्वरूप 16 नये वाहनों के क्रय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
राज्य सम्पत्ति विभाग के पूल में से दिनांक 24 अक्टूबर, 2018 को 05 निष्प्रयोज्य वाहन एवं दिनांक 11 जनवरी, 2019 को 11 निष्प्रयोज्य वाहन कुल 16 निष्प्रयोज्य वाहन नीलाम किये गये, जिसके सापेक्ष आवश्यकता एवं औचित्य के दृष्टिगत प्रतिस्थापन स्वरूप 15 फाॅरच्यूनर (आॅटो) एवं 01 इन्नोवा क्रिस्टा (07 सीटर) कुल 16 नये वाहनों का क्रय किया जाना है।

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