बनारस में होगा भारत का पहला एयरपोर्ट, जहां ऊपर से उड़ेंगे विमान, नीचे से गुजरेंगी गाड़ियां*

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वाराणसी. ऊपर से जहाज उड़ेंगे और नीचे गाड़ियां चलेंगी। जी हां देश का पहला ऐसा रनवे बनने जा रहा है,

जिसेक नीचे टनल से हाइवे गुजरेगा।

दुनिया में जिब्राल्टर एयरपोर्ट का रनवे और जर्मनी के लिपजिंग हाल्ले (स्क्वादिज) एयरपोर्ट के रनवे ऐसे हैं

जिनके नीचे से हाइवे गुजरता है। भारत में ऐसा पहला रनवे उत्तर प्रदेश के बनारस में बनेगा।

यहां के बाबातपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जल्द ही अपडेट किया जाएगा।

इसे ROTH (रनवे ओवर द हाइवे) भी कहा जाता है। इसके लिये एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने परमिशन दे दी है।

इस ROTH के बन जाने के बाद वाराणसी के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का रनवे 2743 मीटर से बढ़कर 4075 मीटर लम्बा हो जाएगा।

इससे यहां बोइंग और बड़े मालवाहक जहाज भी उतर सकेंगे।

जमीन की कमी के चलते रुका है विस्तारीकरण वाराणसी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विस्तारीकरण जमीन की कमी के चलते रुका हुआ है।

इसे अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की मान्यता तो दे दी गयी, पर जमीन की कमी के चलते इसके रनवे को अपेक्षित रूप से अब तक बढ़ाया नहीं जा सका।

मसला ये है कि हवाई अड्डे का विस्तारीकरण यदि पूर्व में होता है तो इधर रेलवे लाइन है और पश्चिम में इसका रास्ता नेशनल हाइवे 56 ने रोक रखा है।

विस्तारीकरण रेलवे लाइन की ओर संभव न होने से संभावनाएं पश्चिम में हाइवे की ओर ही तलाशी जा रही थीं।

अब हाइवे के ऊपर रनवे बनाने की अनुमति के बाद एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का रास्ता साफ हो गया है। इससे दोहरा फायदा यह बताया जा रहा है

कि एक तरफ तो हाइवे के ऊपर से रनवे गुजरेगा और दूसरी ओर हाइवे का भी अपेक्षित चौड़ीकरण किया सकेगा।

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट को विस्तारीकरण की सख्त जरूरत है।

अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां बोइंग जैसे बड़े विमानों के उतरने में दिक्कत है।

विस्तारीकरण की बात काफी समय से कही भी जा रही है।

पर अब तक यह तकनीकी रूप से फंसी हुई है।

इसके लिये 593 एकड़ जमीन की जरूरत है।

एयरपोर्ट अॅथॉरिटी की ओर से राज्य सरकार से जमीन मांगी गयी है।

एयरपोर्ट के पास कई गांवों में जमीन अधिग्रहण करने का प्रस्ताव देने की बात भी कही जा रही है।

कया होगा फायदा ‘रनवे ओवर द हाइवे’ बन जाने से वाराणसी का एयरपोर्ट न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व पटल पर जाना जाएगा।

अब तक इस कड़ी में जिब्राल्टर और लिपजिंग हाल्ले एयरपोर्ट के नाम लिये जाते रहे हैं।

इसके अलावा इससे जमीन की बचत होगी।

यदि हाइवे को हटाकर रनवे का विस्तार किया जाता तो हाइवे के लिये फिर अलग जमीन की जरूरत पड़ती।

उसे एयरपोर्ट कि किनारे-किनारे ले जाना पड़ता।

जमीन के साथ-साथ दूरी भी बढ़ जाती।

इसके अलावा अंडरपास हाइवे होने के चलते इसे चार लेन करने में भी आसानी होगी।


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